एक

रात के सन्नाटे में जब कुछ नही होता,
तुम होती हो।
जब भी वीरान सड़क पर मीलो चला जाता हूँ,
जहाँ दूर दूर तक कुछ नही दिखता,
तुम्हारा चहेरा दिखता है।
जब भी मन आवारा बन जाना चाहता है,
तुम बीच मे आ जाती हो।
जब भी आसमां में तारे गिनने लगता हूँ,
तुम गिनती भुला देती हो।
जब भी कुछ लिखने लगता हूँ,
तुम्हे ही लिख बैठता हूँ।
जब सिनेमा घर में अकेला बैठा मूवी देखता हूँ,
पास वाली खाली सीट पर तुम होती हो।
जब भीड़ भरे रास्ते मे अकेला तेज निकलता हूँ,
पीछे खाली सीट पर तुम कस कर पकड़ती हो।
जब भी कुछ पाने की ख्वाहिश होती है,
तुम न होने का अहसास होता है।
जब सब से नही बोलता,
अकेला मन में तुमसे बोलता हूँ।
जब भी हार जाता हूँ,
तुम्हारा विश्वास लड़ने की शक्ति देता है।
जब भी जीतता हूँ,
बैठा बैठा सोचता हूँ कि तुम कहाँ हो,
हमेशा एक ही जवाब आता है,
मुझमें।
~रौनक

वो

मन को तो जैसे तैसे समझा लेता हूँ मगर,

दिल आज भी बगावत कर लेता है।
वो तो भूल के निकल गए आगे कहीं,

ये आज भी वहीं ठहरा उन्हें याद कर लेता है।
उनकी यादों की तस्वीरें बना कर,

आज भी आंखों को आँसुओ से भर देता है।
मिल पाना उनका अब मुमकिन नही,

फिर भी उनका खयाल  एक दफा कर लेता है।
खोजता है उनकी सी कोई इस जहाँ मैं,

मगर कोई मिलेगी ये मानने से इनकार कर लेता है।
मन को तो जैसे तैसे समझा लेता हूँ मगर,

दिल आज भी बगावत कर लेता है।
~रौनक

साथ

मेरे साथ रहना है तो,
अपना मुझे जैसा हूँ मैं वैसेै,
मज़ा ले मेरे साथ,
मेरी कमियों का, मेरी मस्तियों का,
न की बना मुझे वो की जो मैं कभी बनना नहीं चाहता,
और ना ही तुझे वो नया मैं पसंद भी आऊंगा,
हाँ कुछ तेरी कमियों का भी हम मजा करेंगे मिल,
कुछ तेरी आदतों का भी मजा लेंगे,
मेरे साथ रह कर बन एक पंछी
वो पंछी जो आकाश में उड़ता है,

न जी जो एक पिंजरे में बंद हो कर पड़ा है किसी की शोभा बन,

और गर तू वही पंछी है जिसे पिंजरा पसंद है तो,
आ मेरे साथ उड़ चल,
मैं पिंजरे में बंद नही हो सकता,
आ मेरे साथ उड़ चल।

गढ्ढा

वो खड़ा है धुप मैं लथपथ पसीने से,
लंबी साँस लेता है,
पलकों से पसीना पोंछ थोड़ा सा सर ऊपर घुमा कर,
आँखों पर हथेली की छांया कर,
देखता है आसमान मे सूरज की तरफ,
देखता है कहीं कोई बादल उसको ढकेगा क्या,
फिर निराशा से मुहँ निचा कर,
लग जाता है अपने औजार लिये,
वार पर वार धरती के दामन पर,
जैसे सूरज की धुप का गुस्सा इसी पर निकालेगा,
निराश है धुप से मगर हारा नहीं है,
ठेकेदार के आदमी की छाया कभी कभी पा जाता है,
हरएक वार ऐसा मानो धरती का सीना चीर दे,
आज दो गढ्ढे करने है सोच कर वार तेज कर देता है,
सूरज भी जैसे इसके वार से धरती को बचाने में लगा हो मानो,
जैसे जैसे धुप बढ़ती है वैसे नाजाने क्यों इसकी हिम्मत भी बढ़ रही है,
ले रहा है आज पूरी टक्कर सूरज से,
आज ही क्यों ये तो इसका रोज का ही काम है बचपन से ही,
सूरज से टक्कर ले शाम को दाना-पानी पाना,
धरती को चीरना,
और पा जाता है आज भी लक्ष्य वो सूरज के सामने,
करेगा भी क्या??
यही तो आता है उसे,
सूरज से टक्कर लेना और धरती चीरना।

~रौनक

क्या मैं बुरा हूँ?

कभी सोचता हूँ,
क्या मैं बुरा हूँ?
या फिर यह आम है।

लोग दिल की बात नहीं कहते,
ढोंग करते हैं,
चाहत कुछ और होती है,
इजहार कुछ और करते हैं।
मैं भी जब वही करता हूँ,
तो फिर क्यों सोचता हूँ यही की,
क्या मैं बुरा हूँ।

क्या सब यही सोचते हैं?
और फिर समझा लेते है
मन को, दिमाग को,
की दुनिया ऐसे ही चलती है।
पर क्या सही मैं दुनिया ऐसे ही चलती है?

कभी सोचता हूँ माफ़ी मांग लूँ,
फिर सोचता हूँ क्यों मांग लूँ,
मैंने वही कहा जो उसे सुनना था,
फिर भी खुद को क्यों गलत मान लूँ।

फिर भी कभी अँधेरे में,
जहाँ कोई नजर नहीं आता,
वहाँ अपनी गलतियों को याद कर,
यही सोचता हूँ,
क्या मैं बुरा हूँ।

~रौनक


सपनें

सपनें,

कितने अनोखे होते है न,

हर किसी के होते है न,

रंग बिरंगे होते है न,

छोटे छोटे से होते है न,

कुछ बड़े भी होते है न,

कभी पुरे होते है न,

कभी नहीं भी होते है न,

पर सभी के होते है न।

तुम

​आज भी जब तुम याद आती हो…..

मुस्कुरा देता हूँ।

 

 

उन लम्हो को जी लेता हूँ,

जब तुम्हें पता न होते हुए भी मैं सिर्फ तुम्हारा था…..

जब तुमसे घंटो बाते करता था…..

तुम याद दिलाती थी समय का…..

और मे मुंगेरीलाल जैसे सपनों की दुनिया से बाहर आ जाता था…..

 

 

आज भी याद है,

इतना बेसब्र किसी के लिए नही हुआ मैं,

जितना की तुमसे बात करने को होता था,

पता नहीं कैसी कैसी बाते बनाता था,

ताकि बस घंटो तुमसे बाते कर सकूँ….

तुम भी तो मेरे बचपने मे मेरा साथ दिया करती थी….

 

 

इसीलिए तो,

आज भी जब तुम याद आती हो…..

मुस्कुरा देता हूँ।

 

 

काफी समय हो गया तुमसे बात किए…

कितनी सारी बातें है जो तुम्हें बतानी है मुझे….

सिर्फ तुम्हें….

पर आजकल तुम मिलती कहाँ हो…

मैं भी किसी से नहीं पूछता तुम्हारे बारे मे…

 

पर आज भी

जब तुम याद आती हो…

मुस्कुरा देता हूँ। 
~रौनक